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Monday, 2 April 2012

ना खनजर उठेगा ना तलवार इनसे ..


Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi

Published on 2 April 2012
अफ़ीफ़ अहसन
अगर जनरल सिंह की मानें तो हमारे देश के पास दो दिन से अधिक युद्ध जारी रखने के लिए सही मात्रा में गोला बारूद नहीं है लेकिन जनरल साहब के खुद के तरकश में इतने तीर हैं या यूं कहिए कि इतना गोला बारूद है कि वह देश के राजनीतिज्ञों, जनता और मीडिया को दो महीने तक यानी कि अपनी रिटायर्मेंट की तारीख तक तो जबानी युद्ध में उलझाये रख सकते हैं. जनरल साहब ने अपने सेनाध्यक्ष कार्यकाल अवधी में चाहे कोई भी ऐसा बड़ा कारनामा नहीं किया हो जिसके लिए देश की जनता उनको याद करे मगर जाते जाते वह ऐसे धमाके करने से नहीं चूके रहे हैं जिनके लिए देश उन को हमेशा याद रखेगा.

सबसे पहले तो उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें टटरा ट्रकों की खरीद के लिए उनके एक साथी लेफ्टिनेंट जनरल तेजिंद्र ने चौदह करोड़ रुपये की रिश्वत की पेशकश की थी. उसके बाद उनका एक गुप्त पत्र सामने आगया जिसमें उन्होंने भारतीय सेना में व्याप्त कमियों की ओर प्रधानमंत्री का ध्यान आकर्षित कराया था. अब जनरल सिंह ने सीबीआई की ओर एक और “भ्रष्टाचार बम” लपका दिया है.
सेना प्रमुख द्वारा तृणमूल कांग्रेस के सांसद अम्बीका बेनर्जी के मई 2011 के एक पत्र को सीबीआई को सीधे भेजने से एक नया विवाद पैदा हो गया है. सांसद ने अपने पत्र में “खुफिया” स्पेशल फरन्टीर बल में खरीद में व्यापक घोटालों का आरोप लगाया है. यह उस समय से संबंध रखता है जब लेफटनेंट जनरल दलबीर सिंह उसके महानिरीक्षक थे. इस में रात में देखने के उपकरण, संचार प्रणाली, हथियार और पैराशूट शामिल हैं. यह बल रिसर्च एंड अनालिसेस विंग के तहत काम करती है जो देश की बाहरी खुफिया एजेंसी है.
सांसद बेनर्जी ने पूर्व सेनाध्यक्ष सहित अन्य कई सैन्य अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं, उन्होंने आरोप लगाया है कि उन्होंने सैन्य सौदों में करोड़ों की दलाली कमाई है और अपनी आय से अधिक जायेदादें जमा कर ली है.
शिकायत के साथ जुड़े अपने कवरिंग लेटर में जनरल सिंह ने सीबीआई से बनर्जी की शिकायत की जांच करने को कहा है. बनर्जी के लिखे पत्र पर इतना समय चुप रहने के बाद अब उसे सीधे सीबीआई को भेजने का जनरल साहब का फैसला कुछ लोगों के लिए आश्चर्य जनक हो सकता है लेकिन उसे अपने पुराने दुश्मन से हिसाब बराबर करने के लिए भी देखा जा रहा है. यह बात किसी से छुपी नहीं है कि जनरल साहब ने लेफटीनेंट जनरल दलबीर सिंह सुहाग के आर्मी कमांडर बनाए जाने का सख्त विरोध किया था, हालांकि रक्षा मंत्रालय दलबीर सिंह का पुरजोर समर्थन कर रहा था.
अपने नोट में जनरल सिंह ने दावा किया है कि दलबीर सिंह सुहाग ने सीनियर आरमी अधिकारी की खुफिया वार्षिक रिपोर्ट (एसीआर) को इसलिए डाउनग्रेड किया था क्योंकि यह मेजर जनरल एक कार्टल के दबाव के आगे नहीं झुका था जो सेना को पेराशूट बेचना चाहता था. सेना प्रमुख ने इस अधिकारी का नाम तो नहीं लिखा लेकिन उन्होंने यह जरूर लिखा है कि अधिकारी ने इस संबंध में उन्हें एक लिखित याचिका दी थी.
खुद को मिले रिश्वत के ऑफ़र पर जनरल साहब का पूरे दो साल तक कुछ भी न करना, न ही उसकी लिखित शिकायत करना न ही उसकी जांच की मांग करना, दूसरी ओर एक ऐसे संस्थान के खिलाफ सीबीआई को जांच करने के लिए लिखना जो के सीधे उनके तहत नहीं आता अजीब सा लगता है.
ऐसा नहीं लगता के सीबीआई इस मामले में कुछ कर सकेगी. क्योंकि यह तथ्य कि एसएफएफ “रा” के तहत है मामले को और भी बदतर कर देगा. रा एक ऐसा संगठन है जिसके पास बहुत अधि‍क फंड होता है जिसका ज़िक्र बजट में भी नहीं होता और जो आडिट या अपने खर्च की जवाबदीही के लिए भी ज़िम्मेदार नहीं है.
इसी अधिकार के कारण रा के कुछ प्रमुख और दूसरों ने उसे लूट लूट कर अपने बेटों और बेटियों को विदेश अध्ययन करने और अछी तरह सैटल करने के लिए किया है क्योंकि वह किसी को उत्तरदायी नहीं हैं. इस तरह हर साल करोड़ों रुपये लूट लिए गए. यह भी सच है कि जब भी कोई पकड़ा गया तो उसका मामला गोपनीयता की दफा के तहत दबा दिया गया.
राष्ट्रीय सुरक्षा के पूर्व सलाहकार ब्रजेश मिश्रा ने रिश्वत के प्रस्ताव के आरोप पर कोई कार्रवाई नहीं करने के लिए सरकार और जनरल दोनों को जिम्मेदार ठहराया. उनका यह भी कहना है कि जनरल वीके सिंह को जबरदस्ती छुट्टी पर भेजा जाए. यह पूछे जाने पर कि क्या सेना प्रमुख को बर्खास्त किया जाना चाहिए या जबरन छुट्टी पर भेजा जाना चाहिए, मिश्रा ने कहा कि अगर उनकी बर्खास्तिगी हुयी तो कुछ और भी हो सकता है. अगर उन्हें चाहिए छुट्टी पर भेजा जाता है तो उन्हें बर्खास्त नहीं माना जाएगा.
मिश्रा ने कहा कि उनसे कहा जाना चाहिए कि सरकारी वेतन पर दो महीने की छुट्टी बिताइए और फिर वेतन लीजिए और घर जाइए. प्रधानमंत्री को लिखे सिंह के पत्र के लीक होने के बारे में मिश्रा ने सेना प्रमुख के करीबी साथियों को इसके लिए जिम्मेदार ठहराने की कोशिश की. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जिनका में बहुत सम्मान करता हूँ, ऐसे व्यक्ति नहीं हैं जो इस तरह का कुछ लीक करें. में मान नहीं सकता कि प्रधानमंत्री कार्यालय में नौकर इसे लीक करें. इसलिए यदि जनरल ने इस पत्र को खुद लीक नहीं किया है तो हो सकता है कि उनके दोस्त ने ऐसा किया हो. जनरल सिंह के लेफ्टिनेंट जनरल दलबीर सिंह सुहाग के खिलाफ सीबीआई जांच कराने की सिफारिश पर उन्होंने कहा कि सेना प्रमुख को एसा करने का अधिकार नहीं है.
हालांकि जनरल सिंह के पत्र के लीक होने के समय को लेकर भाजपा ने संदेह व्यक्त किया है. लेकिन राजद ने कहा है कि जनरल सिंह जनता का विश्वास खो चुके हैं और उन्हें बर्खास्त कर दिया जाना चाहिए. समाजवादी पार्टी और जनता दल (यू) के नेताओं ने कहा है कि सेना प्रमुख जनरल वीके सिंह को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को लिखे पत्र को मीडिया को लीक करने के लिए हटा दिया जाना चाहिए. बीजू जनता दिल और वामपंथीयों ने पत्र के लीक होने पर सख्त कार्रवाई की मांग में भागीदारी की और कहा कि जो भी इसके लिए जिम्मेदार है वह बचना नहीं चाहिए. जनता दल (यू) के नेता ‍शिवानंद तिवारी ने कहा कि “यह गंभीर चिंता का मामला है, सेनाध्यक्ष का व्यवहार संदेहास्पद है. अब, कि वह इस विवाद में शामिल हो रहे हैं, शायद वह आरोप स्थानांतरित करने की कोशिश कर रहे हैं.” वीके सिंह को गुप्त मामलों को सार्वजनिक नहीं करना चाहिए. उन्होंने उस समय क्यों नहीं कहा जब वह प्रमुख बने थे.” समाजवादी पार्टी के नेता मोहन सिंह ने कहा. समाजवादी पार्टी के एक नेता राम गोपाल यादव ने मांग की कि जनरल सिंह को तुरंत हटा दिया जाना चाहिए.
हालांकि बाद में अपने बयान में जनरल सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री को भेजे गए सरकारी पत्र के लीक होने को मुलक से गद्दारी के रूप में लिया जाना चाहिए. उन्होंने साफ किया कि यह पत्र उन्होंने लीक नहीं किया है. इस मामले पर जनरल सिंह ने कहा कि उनकी छवी को कलंकित करने का बेतुका रवैया बंद होना चाहिए. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को लिखे उनके पत्र के लीक होने के स्रोत का पता लगाया जाना चाहिए और उससे सख्ती से निपटना चाहिए.
हालांकि रक्षा मंत्री सरकार और जनरल के बीच किसी भी टकराव से लगातार इनकार कर रहे हैं जिस बात का समर्थन जनरल सिंह कर रहे हैं लेकिन फिर भी वह हर वह हरबा अपना रहे हैं जिससे कि सरकार को उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने पर मजबूर होना पड़े और वह जिंदा शहीद के रूप में अपनी शेष जीवन गुज़ार दें. क्योंकि प्रत्येक सैनिक की यह दिली तमन्ना होती हे कि वह देश पर शहीद हो शायद यही इच्छा जनरल सिंह के दिल में भी है और अब उन्हें लग रहा है कि दो महीने रह गए हैं और यह इच्छा पूरी नहीं हो सकती तो क्यों न कुछ ऐसा किया कि वह शहीद कहलाएँ.
ऐसा नहीं लगता कि जनरल सिंह और सरकार के बीच विवाद कम होने का नाम लेंगे. बल्कि ऐसा लगता है कि विवाद आगे और बढ़ेंगे क्योंकि जनरल सिंह जिस स्थान पर बैठे हैं वहां पर चाहे जनरल के अनुसार देश की सेना के पास पर्याप्त गोला-बारूद न हो लेकिन जनरल साहब के तरकश में अभी कई तीर बाकी हैं और समय समय पर उनका इस्तेमाल करेंगे क्योंकि उन्हें एक ऐसी सरकार से हिसाब बराबर करना है जिसने उनकी एक साल की नौकरी को कम कर दिया और उन्हें सुप्रीम कोर्ट तक से हार का मुंह देखना पड़ा.
दूसरी ओर रक्षा मंत्री और सरकार से यह उम्मीद नहीं है कि वह अपना बचाव करने के अलावा जनरल के खिलाफ कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई करेंगे, क्योंकि किसी शायर के बकोल:
ना ख़नजर उठेगा ना तलवार इनसे।
यह बाजू मेरे आज़माए हुवे हैं।।
A K Antony, Afif Ahsen, Daily Pratap, Defence Ministry, General V K Singh, india, Indian Army, Vir Arjun, 

ناخنجر اٹھے گا نا تلوار ان سے۔۔۔


Daily Pratap, Indias Oldest Urdu Daily

Published on 2 April 2012
عفیف احسن

اگر جنرل سنگھ کی مانیں تو ہمارے ملک کے پاس دو دن سے زیادہ جنگ جاری رکھنے کے لئے وافر مقدار میں گولا بارود نہیں ہے لیکن جنر ل صاحب کے خود کے ترکش میں اتنے تیر ہیں یا یوں کہئے کہ اتنا گولا بارود ہے کے وہ دیش کے سیاست دانوں، عوام اور میڈیا کو دو مہینے تک یعنی کہ اپنی ریٹائرمینٹ کی تاریخ تک تو زبانی جنگ میں الجھائے ہی رکھ سکتے ہیں۔جنرل صاحب نے اپنی سربراہی کی مدت معیاد میں چاہے کوئی بھی ایسا بڑا کارنامہ نہ کیا ہو جس کے لئے ملک کا عوام ان کو یاد رکھے مگر جاتے جاتے وہ ایسے دھماکے کرنے سے نہیں چوکے رہے ہیں جن کے لئے ملک ان کوہمیشہ یاد رکھے گا۔
سب سے پہلے تو انہوں نے یہ الزام لگایا کہ ان کو ٹٹرا ٹرکوں کی خرید کے لئے ان کے ایک ساتھی لیفٹیننٹ جنرل تیجندر سنگھ نے چودہ کروڑ روپئے کی رشوت کی پیشکش کی تھی۔اس کے بعد ان کا ایک خفیہ خط منظرعام پر آگیا جس میں انہوں نے ہندوستان کی افواج میں نمایاں خامیوں کی طرف وزیر اعظم کی توجہ مبذول کرائی تھی۔اب جنرل سنگھ نے سی بی آئی کی طرف ایک اور’’ کرپشن بم‘‘لپکا دیا ہے۔
آرمی چیف کے ذریعہ ترنمول کانگریس کے ایم پی امبیکا بنرجی کے مئی 2011کے ایک خط کو سی بی آئی کو براہ راست بھیجنے سے ایک نیا تنازع پیدا ہوگیا ہے۔ ایم پی نے اپنے خط میں خفیہ اسپیشل فرنٹیر فورس میں خریدا ری میں وسیع پیمانے پر گھوٹالوں کا الزام لگایاہے۔ یہ اس وقت سے تعلق رکھتا ہے جب لیفٹننٹ جنرل دلبیر سنگھ اس کے انسپکٹر جنرل تھے۔اس میں رات کو دیکھنے کے آلات، مواصلاتی نظام، ہتھیار اور پیراشوٹ شامل ہیں۔یہ فورس ریسرچ اینڈ اینالسس ونگ کے تحت کام کرتی ہے جو کے ملک کیبیرونی انٹیلی جنس ایجنسی ہے۔
ایم پی بینرجی نے ایک سابق آرمی چیف کے بشمول دوسرے کئی فوجی افسران پر بدعنوانی کے الزامات لگائے ہیں، انہوں نے الزام لگایا ہے کہ ان لوگوں نے فوجی سودوں میں کروڑوں کی دلالی کمائی ہے اور اپنی آمدنی سے زیادہ جائدادیں جمع کرلی ہے۔
شکایت کے ساتھ منسلک اپنے کورنگ لیٹر میں جنرل سنگھ نے سی بی آئی سے بنرجی کی شکایت کی جانچ کرنے کوکہا ہے۔بنرجی کے لکھے خط پر اتنا عرصہ چپ رہنے کے بعد اب اسے براہ راست سی بی آئی کو بھیجنے کاجنرل صاحب کا فیصلہ کچھ لوگوں کے لئے حیران کن ہو سکتا ہے مگر اسے اپنے ایک دیرینہ دشمن سے حسا ب برابر کرنے کے طور پر بھی دیکھا جارہا ہے۔ یہ با ت کسی سے چھپی نہیں ہے کہ جنرل صاحب نے لیفٹننٹ جنرل دلبیر سنگھ سہاگ کے ایک آرمی کمانڈر بنائے جانے کی سخت مخالفت کی تھی، حالانکہ وزارت دفاع دلبیر سنگھ کی پرزور حمایت کررہا تھا۔ 
اپنے نوٹ میں جنرل سنگھ نے دعویٰ کیا ہے کہ دلبیر سنگھسہاگ نے ایک سینیرآرمی آفیسر کی خفیہ سالانہ رپورٹ (اے سی آر) کو اس وجہ سے ڈاؤن گریڈ کیا تھا کیوں کہیہ میجر جنرل ایک ایسے کارٹل کے دباؤ کے آگے نہیں جھکا جو کہ فوج کوپیراشوٹ بیچنا چاہتا تھا۔آرمی چیف نے اس افسر کا نام تو نہیں لکھا مگر انہوں نے یہ ضرور لکھا ہے کہ اس افسر نے اس سلسلے میں انہیں ایک تحریری عرضداشت دی تھی۔ 
خود کو ملے رشوت کے آفر پر جنرل صاحب کا پورے دو سال تک کچھ بھی نہ کرنا، نہ ہی اس کی تحریری شکایت کرنا اورنہ ہی اس کی انکوائری کی مانگ کرنا ، دوسری طرف ایک ایسے ادارے کے خلاف سی بی آئی کو جانچ کرنے کے لئے لکھنا جو کے براہ راست ان کے تحت نہیں آتاہے عجیب سا لگتا ہے۔ 
ایسا نہیں لگتا کے سی بی آئی اس معاملے میں زیادہ کچھ کرسکے گی۔کیونکہ یہ حقیقت کہ ایس ایف ایف’’را‘‘کے تحت ہے معاملات کو اور بھی بدتر کر دے گا۔ را ایک ایسا ادارہ ہے جس کے پاس بہت کثیر فنڈ ہوتا ہے جس کا ذکر بجٹ میں بھی نہیں کیا جاتا اورجو آڈٹ یا اپنے اخراجات کی جوابدیہی کے لئے ذمہ دار نہیں ہے۔ 
اسی اختیار کی وجہ سے را کے کچھ چیف اور دوسروں نے اسے لوٹ لوٹ کراپنے بیٹوں اور بیٹیوں کو بیرون ملک مطالعہ کرنے اوراچھی طرح سیٹل کرانے کے لئے استعمال کیا ہے کیونکہ وہ کسی کو جوابدہ نہیں ہیں۔اس طرح ہر سال کروڑوں روپے لوٹ لئے گئے۔ یہ بھی حقیقت ہے کہ جب بھی کوئی پکڑا گیا تو اس کا معاملہ رازداری کی شق کے تحت دبا دیا گیا۔ 
قومی سلامتی کے سابق مشیر برجیش مشرا نے رشوت کے پیشکش کے الزام پر کوئی کارروائی نہیں کرنے کے لئے حکومت اور جنرل دونوں کو ذمہ دار ٹھہرایا۔ان کا یہ بھی کہنا ہے کہ جنرل وی کے سنگھ کو زبردستی چھٹی پر بھیجا جائے۔یہ پوچھے جانے پر کہ کیا فوج کے سربراہ کو برطرف کیا جانا چاہئے یا انہیں جبراً چھٹی پر بھیجا جانا چاہئے، مشرا نے کہا کہ اگر ان کی برخاستگی ہوئی تو کچھ اور بھی ہو سکتا ہے۔ اگر انہیں لازمی چھٹی پر بھیجا جاتا ہے تو انہیں برطرف نہیں ما ناجائے گا۔ 
مشرا نے کہا کہ ان سے کہا جانا چاہئے کہ آپ سرکاری تنخواہ پر دو ماہ کی چھٹی بتائیے اور پھر تنخواہ لیجیے اور گھر جائیے۔ وزیر اعظم کو لکھے جنرل سنگھ کے خط کے لیک ہونے کے بارے میں مشرا نے فوج کے سربراہ کے قریبی ساتھیوں کو اس کے لئے ذمہ دار ٹھہرانے کی کوشش کی۔ انہوں نے کہا کہ وزیر اعظم جن کا میں بہت احترام کرتا ہوں، ایسے شخص نہیں ہیں جو اس طرح کا کچھ لیک کریں ۔ میں یہ تسلیم نہیں کر سکتا کہ وزیر اعظم کے دفتر میں کسی نوکر نے اسیلیک کیا ہو۔ اس لئے اگر جنرل نے اس خط کو خود لیک نہیں کیا ہے تو ہو سکتا ہے کہ ان کے کسی دوست نے ایسا کیا ہو۔جنرل سنگھ کے لیفٹیننٹ جنرل دلبیر سہاگ کے خلاف سی بی آئی جانچ کرانے کی سفارش پر انہوں نے کہا کہ فوج کے سربراہ کوایسا کرنے کا اختیار نہیں ہیں۔ 
حالانکہ جنرل سنگھ کے خط کے لیک ہونے کے وقت کو لیکر بی جے پی نے شکوک کا اظہار کیا ہے ۔مگر آرجے ڈی نے کہا ہے کہ جنرل سنگھ عوام کا اعتماد کھو چکے ہیں اور ان کو برخاست کردیا جانا چاہئے۔سماج وادی پارٹی اور جنتا دل (یو) کے رہنماؤں نے کہا ہے کہ فوج کے سربراہ جنرل وی کے سنگھ کو وزیر اعظم منموہن سنگھ کولکھے خط کو میڈیا کو لیک کرنے کے لئے برطرف کر دیا جاناچاہئے۔ بیجوجنتا دل اور بایاں محاز نے خط کے لیک ہونے پر سخت کارروائی کا مطالبہ کرنے میں شمولیت اختیار ک اورکہا کہ جوبھی اس کے لیے ذمہ دارہے وہ بچنا نہیں چاہئے۔ جنتا دلہ (یو) کے رہنما شوانند تیواری نے کہا کہ ’’یہ شدید تشویش کا معاملہ ہے ،آرمی چیف کاطرز عمل مشکوک ہے۔ اب، کہ وہ اس تنازعہ میں ملوث ہو رہی ہے، شاید وہ الزام منتقل کرنے کی کوشش کر رہے ہیں‘‘۔ وی کے سنگھ کو خفیہمعاملات کو عوامی نہیں بنانا چاہئے۔انہوں نے یہ اس وقت کیوں نہیں کیا جب وہ سربراہ بنے تھے۔سماج وادی پارٹی کے رہنما موہن سنگھ نے کہا۔ سماج وادی پارٹی کے ایک اور رہنما رام گوپال یادو نے مطالبہ کیا کہ جنرل سنگھ کو فوری طور پر برطرف کر دیا جاناچاہئے۔ 
حالانکہ بعد میں اپنے ایک بیان میں جنرل سنگھ نے کہا کہ وزیر اعظم کو بھیجے گئے سرکاری خطکے لیک ہونے کوملک سے غداری کے طور پر لیا جانا چاہئے۔ انہوں نے صاف کیا تھا کہ یہ خط انہوں نے لیک نہیں کیا ہے۔ اس معاملے پر جنرل سنگھ نے کہا تھاکہ ان کی شبیہہ کو داغدار کرنے کے بے تکے رویہ کو بند ہونا چاہئے۔ انہوں نے کہا کہ وزیر اعظم کو لکھے گئے ان کے خط کے لیک ہونے کے ذریعہ کا پتہ لگایا جانا چاہئے اور اس سے سختی کے ساتھ نمٹنا چاہئے۔ 
حالانکہ وزیردفاع حکومت اور جنرل کے درمیان کسی بھی ٹکراؤ سے لگاتار انکار کررہے ہیں جس کی زبانی تائید جنرل سنگھ بھی کر رہے ہیں مگر پھر بھی وہ ہر ہر وہ حربہ اپنا رہے ہیں جس سے کہ حکومت کو ان کے خلاف کارروائی کرنے پر مجبور ہونا پڑے اور وہ ایک زندہ شہید کے طور پر اپنی بقیہ زندگی گزاردیں۔ہر ایک فوجی کی یہ دلی خواہش ہوتی ہے کہ وہ ملک پر شہید ہوجائے شاید یہ خواہش جنرل سنگھ کے دل میں بھی رہی ہے اور اب ان کو لگ رہا ہے کہ دومہینے رہ گئے ہیں اور یہ خواہش پوری نہیں ہوسکتی تو کیوں نہ کچھ ایسا کیا جائے کہ وہ شہید کہلائیں۔ 
ایسا نہیں لگتا کہ جنرل سنگھ اور حکومت کے بیچ تنازعات کم ہونے کا نام لیں گے۔ بلکہ ایسا لگتا ہے کہ تنازعات آگے اور بڑھیں گے کیونکہ جنرل سنگھ جس جگہ پر بیٹھے ہیں وہاں پر چاہے بقول جنرل ملک کی افواج کے پاس وافرگولا بارود نہ ہو مگر جنرل صاحب کے ترکش میں ابھی بہت سے تیر باقی ہیں اور وہ وقتاً فوقتاً ان کا استعمال بھی کریں گے کیونکہ انہیں ایک ایسی حکومت سے حساب برابر کرنا ہے جس نے ان کی ایک سال کی نوکری کو کم کردیا اور انہیں سپریم کورٹ تک سے ہار کا منہ دیکھنا پڑا ۔ 
دوسری طرف وزیر دفاع اور حکومت سے یہ امید نہیں ہے کہ وہ اپنا بچاؤ کرنے کے علاوہ جنرل کے خلاف کوئی اور تادیبی کارروائی کریں گے ،کیونکہ بقول شاعر 
نا خنجر اٹھے گا نا تلوار ان سے 
یہ بازو میرے آزمائے ہوئے ہیں
A K Antony, Afif Ahsen, Daily Pratap, Defence Ministry, General V K Singh, india, Indian Army, Vir Arjun,