Search

Monday, 22 November 2010

एक था राजा


वीर अर्जुन दिनाक 13-11-2010 में प्राकाशित
 अफीफ अहसन
पिछले दिनों जब श्री लाल कृष्ण आडवाणी को, सुप्रीम कोर्ट के ए राजा मामले पर प्रधानमंत्री सरदार मनमोहन सिंह को शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश मिलने पर, बोलते हुए सुना और देखा तो शेक्सपीयर के ओथेलो का एक सीन याद आ गया जिसमें केसियो कहता है "प्रतिष्ठा, सम्मान, प्रतिष्ठा! हाय! मैंने अपनी साख गंवा दी है. मैंने खुद का अमर हिस्सा खो दिया है, और जो कुछ शेष रह गया है वह बेकार है. मेरा नाम, लागो, मेरी इज़्ज़त!"
बाद में इस महान दुखद नाटक में लागो उससे कहता है. "क्योंकि मैं एक ईमानदार आदमी हूँ
, मैंने सोचा कि आपको कुछ शारीरिक घाव पहुंचे थे, इसमें प्रतिष्ठा की तुलना में अधिक अपराध है. प्रतिष्ठा एक बेकार और सबसे अधिक गलत वस्तु है, अधिकतर बिना किसी योग्यता के प्राप्त की हुई और बगैर योगयता के हारी: तुमने कोई साख नहीँ खोई, जब तक तुम खुद को एसा हारा होआ ना समझो."
हमारे देश में इस समय घोटालों की बहार सी आई हुई है. इसमें देश के हर क्षेत्र के लोग
, हर पार्टी के लोग शामिल हैं. ये लोग अलग अलग भाषाएं बोलते हैं जो शायद एक दूसरे को समझ में ना आयें लेकिन एक भाषा है जो सभी को परसपर समझ में आती है और वह है पैसे की भाषा.
यही नहीं हमारे देश में शीर्ष स्तर पर लूटपाट का ऐसा सिस्टम पनप चुका है जिसमें बड़े नेता
, नोकरशाह, बिचौलिए और पत्रकार शामिल हैं. यह खुलासा आयकर विभाग की ओर से टेप कराए गई कुछ टेलीफोन बातचीत से मिला है.
2 जी स्पैक्ट्र्म वितरण घोटाले की खबर बनने से पहले ही आयकर विभाग एक असरदार बिचौलिया महिला का फोन टेप करवा रहा था
, जो पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों के बारे में उद्योगपतियों के हितों के लिए काम करती है. टेप बताते हैं कि केंद्रीय मंत्रिमंडल के महत्वपूर्ण विभाग हथियाने के लिए कितनी लाबिइंग हुई. एक पत्रिका ने अपने ताजा अंक में बड़े औद्योगिक परिवारों के लिए लाबिइंग करने वाली नीरा राडिया की संचार मंत्री ए राजा, डी एम के सांसद कनिमूझी
और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के दामाद रंजन भट्टाचार्य के साथ बातचीत की टेपों का खुलासा किया है. उनमें साफ संकेत मिलता है कि राडिया की लाबिइंग से ए राजा समेत कई नेता केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह बनाने में सफल रहे. राजा को मंत्री बनाने के लिए दो बड़े पत्रकारों ने भी कांग्रेसयों पर दबाव बनाया. हालांकि इन पत्रकारों का कहना है कि राडिया से उनकी बातचीत पत्रकार होने के नाते हुई थी.
कई अन्य पत्रकारों की राडिया से दूरसंचार और अंबानी भाइयों के गैस मूल्य विवाद जैसे मुद्दों पर बातचीत भी टेप की गई है. टेप करने का काम 20 अगस्त 2008 को शुरू हुआ
, जब राजा संचार मंत्री बन ने के लिए जोर लगा रहे थे और राडिया उनकी मदद कर रही थी. राजा और कनिमूझी की राडिया से बातचीत यूपीए सरकार के दूसरी री में मनमोहन सिंह की सरकार बन ने से कुछ दिन पहले हुई थी.
राडिया के बारे में 104 से अधिक यह टेपें वकील प्रशांत भू
न की सुप्रीम कोर्ट में दायर टीशन के साथ संलग्न हैं. भून ने ए राजा के ख़िलाफ़ आरोप चलाने के लिए आवेदन कर रखा है. कांग्रेस नेतृत्व हैरान है कि यूपीए की दोनों सरकारों के दौरान यह टेप प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से लेकर प्रणव मुखर्जी और पी. चिदंबरम तक को उपलब्ध थे. सवाल उठना चाहिए कि टेपों की अनदेखी करते हुए यूपीए सरकार के दूसरे कार्यकाल में राजा को दूरसंचार मंत्रालय कैसे दिया गया.
अब सरकार ने दूरसंचार क्षेत्र में राजा की पसंद के लोगों की नियुक्ति पर रोक लगा दी है. राजा की अवधि में बीएसएनएल के अध्यक्ष पद के लिए आरके उपाध्याय
, एमटीएनएल के अध्यक्ष पद के लिए कुलदीप सिंह को नामित किया गया था. लेकिन अब उनकी नियुक्ति रोक दी गई हैं वहीं ट्राई के सदस्य के रूप में राकेश महरोतरा की नियुक्ति भी रोक दी गई है. माना जा रहा है कि ट्राई सचिव आरके आरनोलड नए सदस्य हो सकते हैं. यह सारी नियुक्तियाँ राजा के जाने के 48 घंटे के अंदर रोकी गईं. और तो और राजा के पूर्व सचिव आरके चन्दोलिया को भी दूरसंचार विभाग से बाहर भेज दिया गया है. दूरसंचार विभाग में और भी बदलाव जारी हैं देखना होगा कि अब अगला नंबर किसका आता है.
दूसरी ओर 2 जी स्पैक्ट्र्म विवाद के छींटे प्रधानमंत्री के कार्यालय पर भी पड़ने के बाद केंद्र सरकार अब स्पैक्ट्र्म
पाने वाली कंपनियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई कर सकती है. इसके लिए दूरसंचार नियामक एजेंसी ट्राई की ओर से गुरुवार को पेश की गई एक रिपोर्ट को आधार बनाया जा सकता है. ट्राई ने अपनी रिपोर्ट में वर्ष 2008 में उस समय के संबंधित मंत्री ए राजा की मदद से 2 जी स्पैक्ट्र्म प्राप्त करने के लिए पांच कंपनियों के 62 लाइसेंस रद्द करने की सिफारिश की है.
दूरसंचार नियामक प्राधिकरण 2 जी स्पैक्ट्र्म प्राप्त करने के समय सरकार के साथ किए गए समझौते के अनुसार अपनी सेवाओं शुरू नहीं होने के आधार पर सभी कंपनियों पर भारी भरकम आर्थिक जुर्माना लगाने या लाइसेंस रद्द करने की बात कही है. प्राधिकरण की इस रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से वीडियोकान
, यूनिनार, एतीसलात (स्वान) जैसी कंपनियों के लाइसेंस रद्द करने की मांग की है. इनमें से कई कंपनियां इस समय देश के कुछ सर्किलों में अपनी सेवाएं दे रही हैं और अब भारी भरकम विदेशी निवेश हो चुका है. जानकारों के अनुसार डॉट ने इस रिपोर्ट को अमल में लाने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है.
सूत्रों के अनुसार ट्राई की यह रिपोर्ट गडबडियाँ करके लाइसेंस हासिल करने वाली कंपनियों को भारी मुसीबत में डाल सकती हैं. अगर सरकार उनके लाइसेंस रद्द करती है तो उनके लाखों ग्राहकों को भी परेशानी उठानी पड़ सकती है. यह भी साबित होता है कि इन कंपनियों का मुख्य उद्देश्य लाइसेंस प्राप्त कर उसे अन्य कंपनियों को बेचना था.
ट्राई ने पाया है कि 34 मामलों में कंपनियों ने लाइसेंस समझौते के खिलाफ काम किया है. चार मामलों में सेवा शुरू करने में देरी की गई जबकि 31 मामलों में देर बहुत अधिक थी. नियामक एजेंसी एतीसलात को 15 सर्किलों
, यूनिनार को आठ, सिस्टेमा श्याम टेलीकाम को 10, वीडियोकान को 10 और लुप दूरसंचार को 19 सर्किलों में दिए गए लाइसेंस रद्द करने के पक्ष में है.
नियंत्रक और परीक्षक जनरल की रिपोर्ट में भी पूर्व संचार मंत्री ए. राजा पर भारी गड़बड़ी करने का आरोप लगाया गया है. ट्राई की रिपोर्ट में जिन कंपनियों का उल्लेख है उनके बारे में सीए जी की 2 जी स्पैक्ट्र्म वितरण रिपोर्ट में भी काफी कुछ कहा गया है. सीए जी ने स्पैक्ट्र्म वितरण में गड़बड़ी से देश को एक लाख 76 हजार करोड़ रुपए से अधिक आय के नुकसान की बात कही है.
स्पैक्ट्र्म घोटाले में संचार मंत्रालय में गड़बड़ी का सीधा आरोप लगाते हुए सीए जी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि 2 जी स्पैक्ट्र्म वितरण में मंत्रालय ने मनमानी और खुदग़रज़ी की हर सीमा लांघ दी. कुछ कंपनियों को लाभ देने के लिए बिना वाजिब कारण के पूर्व संचार मंत्री ए राजा ने कानून
, वित्त और दूरसंचार आयोग के सुझाव की अनदेखी की. यही नहीं, प्रधानमंत्री की सलाह को भी हाशिए पर रखा गया.
इससे 2 जी स्पैक्ट्र्म वितरण में सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ. नई कंपनियों को लाइसेंस देने में सीधे मंत्री की भागीदारी की ओर संकेत करते हुए सीए जी ने अपनी रिपोर्ट में कहा
, 'विभाजन की प्रक्रिया में गड़बड़ी इसी से साफ हो जाती है कि पहले आओ पहले पाओ की नीति के बावजूद सभी अनुरोध दाताओं को एक ही दिन लेटर ऑफ इन्टेंट जारी किया गया और यह निर्णय मंत्री के स्तर पर लिया गया.
रिपोर्ट यह भी कहती है कि
, 'प्रधानमंत्री ने विभाजन की प्रक्रिया में पारदर्शीता सक्श नीति बनाने की सलाह दी थी लेकिन उनकी सलाह की अनदेखी करके संचार मंत्रालय ने वर्ष 2008 में 2001 की दर
पर 2 जी स्पैक्ट्र्म आवंटित किया. इसके लिए सभी कानून और प्रक्रिया की अनदेखी की गई.
सीए जी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि 2 जी स्पैक्ट्र्म लाइसेंस देने के लिए पहले आओ पहले पाओ की शर्त का पालन करने का दावा दूरसंचार मंत्रालय ने किया था. इस संबंध में प्रधानमंत्री कार्यालय को भी यही संदेश पत्र के माध्यम से गया
, लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं किया गया. जो अनुरोध मार्च 2006 से 25 सितम्बर 2007 के बीच जमा की गई थीं, उन सभी को एक ही दिन 10 जनवरी 2008 को लेटर ऑफ इन्टेंट जारी किया गया.
सीएजी ने कहा कि पहले आओ पहले पाओ शर्त में परिवर्तन और पैसा जमा कराने के आधार पर स्पैक्ट्र्म मिलने को लेकर शायद कुछ कंपनियों को पहले से ही पता था. यही वजह है कि कंपनियां बैंक ड
राबनाकर पहले से ही तैयार थीं.
सीए जी ने संदेह जताया है कि आखिर कुछ कंपनियां किस तरह एक ही दिन में पंद्रह सौ करोड़ रुपए से अधिक का बैंक ड
राट बना सकती है.
इन सब बातों से लगता है कि इस तथाकथित
'राजा' ने कैसे हमारे देश के वास्तविक राजा यानी प्रधानमंत्री ओर संवेनिक संस्थाओं को किनारे करते हुए संचार मंत्रालय पर अपना राज थोप दिया और स्वयं राजा बन गया.
हालांकि यह संभव नहीं है कि राजा ने अकेले ही बिना किसी सहायता के यह कारनामा अंजाम दिया होगा बल्कि अब तो एसा महसूस होता है कि राजा के पीछे उनकी पूरी पार्टी डी एम के इस घोटाले में शामिल थी वरना उन्हें फिर संचार मंत्रालय कभी नहीं दिया जाता
, हालांकि प्रधानमंत्री दूसरी बार राजा को मंत्री बनाने के पक्ष में नहीं थे मगर जब डी एम के अड़ गई तो उन्हें झुकना पड़ा और राजा को फिर से मंत्री ही नहीं बनाया गया बल्कि उन्हें वही विभाग दिया गया जिसमें उन पर घोटाले का आरोप था ताकि इस घोटाले को दबाया जाए और उनकी चहीती कंपनियों पर कोई ऑच न आने पाए.
अब तो जांच इस बात की होनी चाहिए कि किस किस को कितनी कितनी रकम मिली है और जांच न तो जेपीसी से कराया जाए और न ही इसे सीबीआई से कराया जाए बल्कि इस की जांच के लिए न्यायिक आयोग बनाया जाए जो स्वतंत्र रूप से सुप्रीम कोर्ट के तहत अपनी जाँच करे.
यह लेख लागो के इस संवाद के साथ समाप्त करन चाहता हुं "माना कि तुम एक बहुत ही नेक नाम हो. मगर मौजूदा समय ओर इस देश की स्थिति और हालात को देखते हुए मेरी दिली इच्छा है कि यह ना हुआ होता
, लेकिन क्योंकि यह जैसा है वैसा ही है, इसलिए अपने लाभ के लिए इस का सुधार कर लो."

No comments:

Post a Comment