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Tuesday, 13 December 2011

अमेरिका और ईरान के बीच स्टार-वार


Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi

Published on 12th December 2011
अफ़ीफ़ अहसन
पिछले दिनों ईरान ने दावा किया कि उसने एक बिना पायलट के ड्रोन विमान को मार गिराया है जो ईरान के पूर्वी हिस्से पर उड़ान भर रहा था. ईरानी मीडिया का कहना है कि यह ड्रोन विमान जो जासूसी के उद्देश्य से प्रयोग किया जाता है नवीनतम RQ-170 श्रृंखला का है. ईरानी मीडिया पर यह दावा किया गया कि ड्रोन विमान को बहुत अधिक नुकसान नहीं पहुँचा है. राडार पर नज़र न आने वाले इस विमान को बनाने और प्रयोग करने की घोषणा अमेरिका ने दो साल पहले ही की थी. ईरानी सेना ने कहा है कि ईरान की वायु सीमा के इस तरह के उल्लंघन की प्रतिक्रिया केवल ईरानी हवाई सीमा तक सीमित नहीं रहेगी. अमेरिका ने हाल ही में ईरान पर परमाणु हथियार बनाने के आरोप में आर्थिक प्रतिबंधों को सख्त कर दिया था जिसके बाद पश्चिमी देशों ने भी ऐसे ही क़दम उठाए हैं. हालांकि ईरान का कहना है कि उसका पर्माणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है.
हालांकि अमेरिका ने शुरू में आधिकारिक तौर पर इस बात को स्वीकार नहीं किया. मगर बाद में अमेरिकी अधिकारी अपने ड्रोन के लापता होने की पुष्टि कर चुके हैं. अब ईरान के सरकारी टीवी ने अमेरिका के सबसे आधुनिक ड्रोन विमान की फुटेज प्रसारित की है. रिपोर्ट में बताया गया है कि यह विमान देश के पूर्वोत्तर क्षेत्र में बहुत अंदर तक घुस आया था. 2 मिनट से अधिक अवधि की वीडियो फुटेज में ईरानी सैन्य अधिकारियों को इस जासूसी विमान का निरीक्षण करते दिखाया गया है. सरकारी टीवी की फुटेज में RQ-170 सेनटैनल नामक यह जासूस विमान सही हालत में दिखाई दे रहा है. ईरानी क्रांतिकारी गार्ड के एयरोस्पेस डिवीज़न के प्रमुख जनरल अली हाजी ज़ादा ने दावा किया है कि जासूसी विमान को इलेक्ट्रॉनिक घात लगाकर क़ब्ज़े में किया गया जिसकी वजह से उसे कम से कम नुकसान पहुंचा. सरकारी टीवी के अनुसार इस विमान को कब्जे में लेने के लिए गार्ड और ईरान की रेगलर सेना ने संयुक्त कार्रवाई की. पर्यवेक्षकों का कहना है कि इस फुटेज का उद्देश्य अमेरिकी विमान को मार गिराने के दावे की पुष्टि के साथ-साथ प्रोपेगंडा है क्योंकि फुटेज में जहाज के नीचे की ओर लटकाए गए अमेरिकी झंडे में सितारों की जगह पर मानव खोपड़ियां नज़र आ रही हैं. इसके अलावा एक बैनर भी लगा है जिस पर सवालिया निशान के साथ लिखा है “अमेरिका यह हरकत नहीं कर सकता?”. अमेरिकी रक्षा विभाग पेन्टागन के एक प्रवक्ता ने इस फुटेज के हवाले से कहा है कि सेना इस फुटेज की समीक्षा कर रही है. लेकिन प्रवक्ता ने इस बारे में अधिक जानकारी उपलब्ध नहीं कराइ है.
जो तस्वीरें और वीडियो फुटेज जारी की गई है उसके विश्लेषण से ड्रोन के वास्तविक होने और उसे उतारे जाने या मार गिराए जाने के बारे में विभिन्न राय जताई जा रही हैं. कुछ बातें ऐसी हैं जिससे कि यह कहा जा सकता है कि यह फर्ज़ी है. एक रूपरेखा सबसे उपर एक्सेस पैनल के साथ कुछ ज्यादा ही लंबी चली गयी है और स्क्रू की तरह के निशान जो उसके किनारे के साथ हैं कुछ अधिक अजीब हैं. इस जहाज को नीचे से देख पाने में सक्षम नहीं. ईरान क्यों चाहेगा कि विमान को पहुँचने वाले नुकसान को प्रदर्शित करे? पंखों के अलग होने और फिर गलत ढंग से लगाए जाने की यह व्याख्या की जा सकती है कि यह एक चकमा है, हालांकि यह अच्छा कारीगरी का नमूना हो सकता क्योंकि शेष भाग बहतरीन हालत में है, लेकिन इस कमी पर विचार करने की जरूरत है.
ड्रोन गिरने की तुरंत बाद घटना स्थल की कोई फोटो उपलब्ध नहीं है. बिना यह जाने कि किस तरह उसे ज़मीन पर उतारा गया या गिर कर तबाह हो गया और ऐसे हादसे के बाद भी इतनी अच्छी हालत में बचा रहा. यह बात अधिकांश लोगों को यह सोचने पर मजबूर कर सकती है कि किया एसा बिलकुल असंभव है.
कुछ समाचार एजेंसियों ने अज्ञात अमेरिकी सरकारी सूत्रों के हवाले से कहा है कि केंद्रीय कमान द्वारा घटना स्थल की उपग्रह से खींची गई तस्वीरों में एक बड़े मैदान में ड्रोन का मलबा फैला हुआ देखा गया था. इस बात में कुछ वजन लगता है, क्योंकि किसी बेलगाम दुर्घटना की स्थिति में आमतौर पर धमाकेदार विस्फोट और तबाही होती है. मगर हमेशा ऐसा नहीं होता.
फोटो एक‍जि़फ डेटा (वह डेटा जो तस्व‍ीर खींचने के समय इसमें शामिल होजाता है) से पता चलता हे कि ड्रोन हमलों की तस्वीरें एक 5D मार्क II कैमरे से एक 28mm लेंस प्रयोग करके 17 सितंबर 2011 को ली गई थी. मगर किसी भी कैमरे में गलत तारीख सेट हो सकती है. ये ईरानी दावे के सही होने के खिलाफ अब तक की सब से मजबूत शहादत हो सकती है.
उसके सही होने के बारे में जो विवरण पेश किया जा रहा है वह यह है कि राडार ‍िडफयूज़र / मेष ‍िग्रल के पीछे एक मोटर दिखायी दे रहा है. यह एक बहुत बारीक विवरण है जिसकी जरूरत ईरान केवल फोटोग्राफी सबूत देने के लिए नहीं थी. यह तकनीक के इतिहास का हिस्सा है, कुछ जो “एक्सपैंडबल स्टेल्थ” की सोच से मेल रखता है और इंजन में किसी भी राडार की लहरों को टकराकर वापस जाने को कम करने में मदद करता है.
तसवीरों में सभी बारीक विवरण ठीक वहीं पर हैं जहां उन्हें होना चाहिए. कुछ विवरणों का संतुलन बहुत आश्चर्यजनक है. जिससे यह लगता है कि यह एक बेहतरीन और विश्वसनीय प्रतिलिपि नहीं है जिसके लिए ईरान के पास समय और पैसा दोनों की कोई कमी नहीं थी.
एक बड़ी तस्वीर जो दिखाए गए जहाज़ के बारे में सबसे अधिक प्रभावशाली है, और जो एक बड़ी बात है. कुल व्यास, किनारों की ढाल, उसकी चोंच की गोलाई, सब कुछ है और उसका बराबर हिसाब किताब है. विमान के मॉडल में सभी आवश्यक जानकारी मौजूद हो सकती हैं, लेकिन अगर एक भी लाइन गलत है या अजीब है या कोण ग़लत है तो सब कुछ एक खिलौने वाले जहाज की तरह दिखाई देगा हालांकि यह ऐसा नही है.
इसलिए चाहे किस्मत हो या कौशल, ईरान के कब्जे में एक पूरा RQ-170 सेनटैनल ड्रोन है जिसे कि लोकहीड स्कंक ने तैयार किया था. शुरूआत में तो यह लग रहा था कि जालसाजी का यह एक बेहतरीन नमूना है और फोटोशाप का कमाल है मगर नज़दीकी जांच, एक अनुसंधान और घंटों जमा घटा के बाद स्थिति स्पष्ट हो गयी है और पूरी तरह विश्वास किया जा सकता है कि जो कुछ आप को तस्वीर और ईरानी टीवी वीडियो में दिखाया गया है वह वास्तव में वही है जिसका दावा किया जा रहा है.
लोग ईरानी सेना को अधिक महत्व नहीं देते हैं, हालांकि ईरानी सेना बहुत व्यापक संसाधनों से सुसजिज्त है, विपरीत उसके जिस पर अधिकांश लोगों को विश्वास है. यदि ईरान की मानी जाए तो उन्होंने उसको इलेक्ट्रॉनिक घात लगाकर नीचे उतारा है जिसके दो अर्थ हो सकते हैं. पहला यह कि उन्होंने ड्रोन का जुड़ाव उसके कंट्रोल सेंटर से तोड़ दिया और इसके बाद वह खुद नीचे आगिरा. या फिर यह कि उसने अमेरिका का संपर्क तोड़ कर उसे अपने कंप्यूटर से नियंत्रित कर लिया और ठीक ठाक उतार लिया. यदि दूसरी बात सही है तो यह अमेरिका के लिए बहुत ही खतरनाक हो सकता है. क्योंकि अगर ईरान ने ऐसी तकनीक ईजाद कर ली है या हासिल कर ली है तो फिर किसी भी संभावित युद्ध में अमेरिका के मिसाइल का मुंह उस की ओर या उसके साथियों की ओर मोड़ा जासकता है. और अगर ऐसा होता है तो स्टार-वार जिसके अमेरिका और रूस के बीच लड़े जाने का अनुमान लगाया जाता था आने वाले दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच लड़ी जाएगी.
Afif Ahsen, Daily Pratap, Vir Arjun, Iran, America, Drone,

2 comments:

  1. mashallah bahut accha murasaela hai

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    1. bahut bahut shukria
      afif ahsen

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