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| Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi |
Published on 1st August 2011
अफ़ीफ़ अहसन
आखिरकार येदुरप्पा ने इस्तीफा दे ही दिया. कर्नाटक मुख्यमंत्री येदुरप्पा ने ऐतवार दोपहर बाद राजभवन जाकर राज्यपाल हंसराज भारद्वाज को इस्तीफा सौंप दिया. इस अवसर पर येदुरप्पा के साथ लगभग 70 विधायक मौजूद थे. हालांकि उन्हें ऐसा बहुत पहले ही कर देना चाहिए मगर वह अपनी जिद पर उड़े रहे और इस्तीफा देने में हील हुज्जत करते रहे.
लोकायुक्त की रिपोर्ट में येदुरप्पा पर आरोप था कि उन्होंने सरकारी जमीन अपने दामाद, बेटों और रिश्तेदारों को कोड़यों के मोल ख़रीदवाई थी जिसे उन्होंने कई गुना दामों पर खनन माफिया को बेच दिया था. जिसकी जांच हुई और लोकायुक्त ने अपनी रिपोर्ट राज्य के मुख्य सचिव को सौंप दी जिसमें येदुरप्पा को दोषी बताया गया है. लोकायुक्त द्वारा दोषी करार दिए जाने के बाद राज्य के मुख्यमंत्री बीएस येदुरप्पा ने भाजपा अध्यक्ष गडकरी के कहने के बावजूद इस्तीफा उन्हें दिया और चुपचाप जहाज़ पकड़ कर बंगलुरू रवाना हो गए. इसके बावजूद कि भाजपा के बड़े नेताओं की ओर से उन्हें इस्तीफ़ा देने की हिदायत की गई थी लेकिन येदुरप्पा इसके लिए तैयार नहीं हुए. मजबूरन भाजपा के संसदीय बोर्ड को उनको इसतीफा देने का निर्देश देना पड़ा. संसदीय बोर्ड की बैठक में भाग लेने वाले नेताओं में आडवाणी, सुषमा स्वराज, अरुण जेटली, राजनाथ सिंह और वेन्कया नायडू भी शामिल थे. इसके बाद वैकल्पिक नेता की तलाश के लिए पार्टी के दो वरिष्ठ नेताओं अरुण जेटली और राजनाथ सिंह को शनिवार को बंगलुरू भेज दिया गया था.
इस सबके बावजूद कर्नाटक की राजनीति में अच्छा दखल अमल रखने वाले येदुरप्पा पद नहीं छोड़ने की जिद पर उड़े रहे और धमकी देते रहे कि वह पार्टी के लिए परेशानी खड़ी कर देंगे.
दिल्ली से वापस आते ही येदुरप्पा ने अपनी आवास पर विधायकों की बैठक बुलाइ और यह भी घोषणा की कि वह कार्यक्रम के अनुसार अपनी कैबिनेट की बैठक भी बुलाएँगे. राज्य भाजपा अध्यक्ष एस इशवरप्पा ने जो खुद भी दिल्ली में थे विधायकों को इस बैठक में भाग लेने के खिलाफ चेतावनी है. मगर बैठक हुई और उसमें पर्याप्त विधायकों और वजीरों ने भाग लिया लेकिन पार्टी सूत्रों का कहना था कि वे केवल नैतिक रूप से मुलाकात करने गए थे और जैसे ही वैकल्पिक नेता के नाम घोषित कर दिया जाएगा सभी विधायकों पार्टी के साथ हो जाएंगे.
इस बैठक के बाद येदुरप्पा ने इस्तीफा देने से यह कहते हुए इनकार कर दिया कि चूंकि शुभ महुरत नहीं है इसलिए वह अभी इस्तीफा नहीं देंगे बल्कि ऐतवार को शुभ महुरत में ही अपना इस्तीफा देंगे क्योंकि ऐसा करना उनके करयर के लिए अशुभ होगा और उनके करयर को नुक़सान होगा. अभी तक तो यह सुनने में आया था कि किसी मुख्यमंत्री ने शुभ महुरत में शपथ ली, शुभ महुरत में त्यागपत्र की मिसाल अब से पहले कहीं नहीं मिलती. दरअसल येदुरप्पा का इरादा था कि हाई कमान को इस बात के लिए मजबूर करें के वह उनके किसी करीबी को मुख्यमंत्री बनाए और उन्हें राज्य भाजपा का अध्यक्ष बनाया जाए. कहा जा रहा है कि येदुरप्पा ने इस्तीफा सौंपने से पहले पार्टी के सामने यह शर्त रखी थी कि वे नए सीएम के नाम की घोषणा पहले ही करे उसके बाद वह अपना इस्तीफा देंगे.
भाजपा का शीर्ष नेतृत्व और येदुरप्पा के बीच उनके इस्तीफे को लेकर तल्ख स्थिति पैदा हो गई थी. मगर पार्टी की ओर से यह भरोसा दिलाया गया कि अगले मुख्यमंत्री के चयन में उनकी राय ली जाएगी, इसके बाद येदुरप्पा अपना छोड़ने के लिए राजी हुए. येदुरप्पा के बाद राज्य के अगले मुख्यमंत्री पद के लिए सांसद सदानंद गोड़ा और राज्य के दो मंत्रियों वी एस आचार्य और सुरेश कुमार का नाम चल रहा है.
अगर भाजपा येदुरप्पा से इस्तीफा नहीं दिलाती तो भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ इसके अभियान को जबर्दस्त धक्का पहुंचता और वे किस मुंह से कांग्रेस के भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान चलाती.
हालांकि अभी सबका ध्यान येदुरप्पा के भ्रष्टाचार की तरफ ही है लेकिन जब उनके इस्तीफे की धूल छंटेगी और कर्नाटक के लोकायुक्त संतोष हेगड़े की रिपोर्ट का बारीकी से अध्ययन किया जाएगा तो इसमें कांग्रेस और जनता दल (एस) भी बराबर फंसती दिखेगी. अपनी रिपोर्ट में लोकायुक्त ने कहा है कि राज्य में खनन क्षेत्र में 16 हजार 85 करोड़ का घोटाला हुआ है, जिसमें से 30 करोड़ रुपये मुख्यमंत्री येदुरप्पा ओर उनके परिवार को दिया गया है. लेकिन इस रिपोर्ट का चौंकाने वाला सार यह है कि जिस साउथ वेस्ट माइनिंग कंपनी ने येदुरप्पा परिवार को तीस करोड़ रुपये दिए हैं वह माइनिंग कंपनी कांग्रेसी सांसद नवीन जिंदल के भाई सज्जन जिंदल की है. पूरा देश जानता है कि जिंदल परिवार पक्का काँग्रसी है. सज्जन जिंदल के पिता ओपी जिंदल हरियाणा में कांग्रेस के मंत्री थे, तो उनकी मां सावित्री जिंदल आज भी हरियाणा सरकार में मंत्री हैं.
हालांकि इस रिपोर्ट में रेड्डी बंधुओं का भी उल्लेख है जो भाजपा की राज्य सरकार में मंत्री हैं और उनके बारे में कहा गया है कि राज्य सरकार के भरोसे के बाद भी रेड्डी बंधुओं ने अवैध खनन जारी रखी. लेकिन नवीन जिंदल के भाई सज्जन जिंदल के जेएसडबलु की सबसीडरी कंपनी साउथ वेस्ट माइनिंग पर बड़ा सवाल उठाया गया है. लोकायुक्त संतोष हेगड़े का कहना है कि सज्जन जिंदल की कंपनी ने दस करोड़ रुपये येदुरप्पा परिवार के ट्रस्ट को दिए और बीस करोड़ रुपये में येदुरप्पा परिवार की एक ऐसी ज़मीन खरीदी जिसकी बाजार में कीमत महज 1.4 करोड़ थी.
सज्जन जिंदल देश के बड़े स्टील व्यापारी हैं और उनकी कंपनी जिंदल स्टील वर्क्स का वार्षिक कारोबार 23 हजार करोड़ का है. यह जिंदल स्टील वर्क्स ओपी जिंदल समूह का हिस्सा है जिसकी एक अन्य कंपनी जेएसडबलु पावर में यही सज्जन जिंदल अध्यक्ष हैं और कांग्रेस के सांसद नवीन जिंदल सह अध्यक्ष हैं. जाहिर है जब कर्नाटक में खदानों को खोद कर माल भरने की दौड़ लगी हो तो सज्जन जिंदल भला क्यों पीछे रहते. सज्जन जिंदल ने तुरंत एक अस्थायी कंपनी बनाई और उसके नाम पर कर्नाटक में लोह खोदने पहुंच गए. लोकायुक्त संतोष हेगड़े ने अपनी रिपोर्ट में सवाल उठाया है कि ' जो कंपनी वित्तीय रूप से मजबूत नहीं है, इसके द्वारा असाधारण भुगतान किए जाने के बारे में मुझे यह समझने में बहुत मुश्किल हो रही है कि क्या कोई उधार लेकर दान देगा'' रिपोर्ट में कहा गया है कि, ''इसके चलते, कुछ फ़ाइलों को केंद्र को कार्रवाई के लिए भेजा जाना था, जो नहीं भेजा गया. यह भ्रष्टाचार कानून के दायरे में आ सकता है और मुख्यमंत्री के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है.''
इस रिपोर्ट के अनुसार अवैध खनन की काली कमाई में येदुरप्पा के अलावा राज्य सरकार के चार मंत्रियों और 600 के करीब अधिकारी भी शामिल थे. केवल 2006 से 2010 के बीच 16,085 करोड़ के घोटाले का दावा कर रही यह रिपोर्ट इस बात को प्रदर्शित करता है कि मंत्रियों, अधिकारियों और खनन माफिया के मजबूत नेटवर्क ने खजाने को केसे इतना लूटा है. इसके अलावा कांग्रेस के एक नेता और जनता दल (एस) के पूर्व मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी का नाम भी इस रिपोर्ट में शामिल है.
Tags: Afif Ahsen, BJP, Daily Pratap, Lok Ayukt, Vir Arjun, Yadyurappa
लोकायुक्त की रिपोर्ट में येदुरप्पा पर आरोप था कि उन्होंने सरकारी जमीन अपने दामाद, बेटों और रिश्तेदारों को कोड़यों के मोल ख़रीदवाई थी जिसे उन्होंने कई गुना दामों पर खनन माफिया को बेच दिया था. जिसकी जांच हुई और लोकायुक्त ने अपनी रिपोर्ट राज्य के मुख्य सचिव को सौंप दी जिसमें येदुरप्पा को दोषी बताया गया है. लोकायुक्त द्वारा दोषी करार दिए जाने के बाद राज्य के मुख्यमंत्री बीएस येदुरप्पा ने भाजपा अध्यक्ष गडकरी के कहने के बावजूद इस्तीफा उन्हें दिया और चुपचाप जहाज़ पकड़ कर बंगलुरू रवाना हो गए. इसके बावजूद कि भाजपा के बड़े नेताओं की ओर से उन्हें इस्तीफ़ा देने की हिदायत की गई थी लेकिन येदुरप्पा इसके लिए तैयार नहीं हुए. मजबूरन भाजपा के संसदीय बोर्ड को उनको इसतीफा देने का निर्देश देना पड़ा. संसदीय बोर्ड की बैठक में भाग लेने वाले नेताओं में आडवाणी, सुषमा स्वराज, अरुण जेटली, राजनाथ सिंह और वेन्कया नायडू भी शामिल थे. इसके बाद वैकल्पिक नेता की तलाश के लिए पार्टी के दो वरिष्ठ नेताओं अरुण जेटली और राजनाथ सिंह को शनिवार को बंगलुरू भेज दिया गया था.
इस सबके बावजूद कर्नाटक की राजनीति में अच्छा दखल अमल रखने वाले येदुरप्पा पद नहीं छोड़ने की जिद पर उड़े रहे और धमकी देते रहे कि वह पार्टी के लिए परेशानी खड़ी कर देंगे.
दिल्ली से वापस आते ही येदुरप्पा ने अपनी आवास पर विधायकों की बैठक बुलाइ और यह भी घोषणा की कि वह कार्यक्रम के अनुसार अपनी कैबिनेट की बैठक भी बुलाएँगे. राज्य भाजपा अध्यक्ष एस इशवरप्पा ने जो खुद भी दिल्ली में थे विधायकों को इस बैठक में भाग लेने के खिलाफ चेतावनी है. मगर बैठक हुई और उसमें पर्याप्त विधायकों और वजीरों ने भाग लिया लेकिन पार्टी सूत्रों का कहना था कि वे केवल नैतिक रूप से मुलाकात करने गए थे और जैसे ही वैकल्पिक नेता के नाम घोषित कर दिया जाएगा सभी विधायकों पार्टी के साथ हो जाएंगे.
इस बैठक के बाद येदुरप्पा ने इस्तीफा देने से यह कहते हुए इनकार कर दिया कि चूंकि शुभ महुरत नहीं है इसलिए वह अभी इस्तीफा नहीं देंगे बल्कि ऐतवार को शुभ महुरत में ही अपना इस्तीफा देंगे क्योंकि ऐसा करना उनके करयर के लिए अशुभ होगा और उनके करयर को नुक़सान होगा. अभी तक तो यह सुनने में आया था कि किसी मुख्यमंत्री ने शुभ महुरत में शपथ ली, शुभ महुरत में त्यागपत्र की मिसाल अब से पहले कहीं नहीं मिलती. दरअसल येदुरप्पा का इरादा था कि हाई कमान को इस बात के लिए मजबूर करें के वह उनके किसी करीबी को मुख्यमंत्री बनाए और उन्हें राज्य भाजपा का अध्यक्ष बनाया जाए. कहा जा रहा है कि येदुरप्पा ने इस्तीफा सौंपने से पहले पार्टी के सामने यह शर्त रखी थी कि वे नए सीएम के नाम की घोषणा पहले ही करे उसके बाद वह अपना इस्तीफा देंगे.
भाजपा का शीर्ष नेतृत्व और येदुरप्पा के बीच उनके इस्तीफे को लेकर तल्ख स्थिति पैदा हो गई थी. मगर पार्टी की ओर से यह भरोसा दिलाया गया कि अगले मुख्यमंत्री के चयन में उनकी राय ली जाएगी, इसके बाद येदुरप्पा अपना छोड़ने के लिए राजी हुए. येदुरप्पा के बाद राज्य के अगले मुख्यमंत्री पद के लिए सांसद सदानंद गोड़ा और राज्य के दो मंत्रियों वी एस आचार्य और सुरेश कुमार का नाम चल रहा है.
अगर भाजपा येदुरप्पा से इस्तीफा नहीं दिलाती तो भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ इसके अभियान को जबर्दस्त धक्का पहुंचता और वे किस मुंह से कांग्रेस के भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान चलाती.
हालांकि अभी सबका ध्यान येदुरप्पा के भ्रष्टाचार की तरफ ही है लेकिन जब उनके इस्तीफे की धूल छंटेगी और कर्नाटक के लोकायुक्त संतोष हेगड़े की रिपोर्ट का बारीकी से अध्ययन किया जाएगा तो इसमें कांग्रेस और जनता दल (एस) भी बराबर फंसती दिखेगी. अपनी रिपोर्ट में लोकायुक्त ने कहा है कि राज्य में खनन क्षेत्र में 16 हजार 85 करोड़ का घोटाला हुआ है, जिसमें से 30 करोड़ रुपये मुख्यमंत्री येदुरप्पा ओर उनके परिवार को दिया गया है. लेकिन इस रिपोर्ट का चौंकाने वाला सार यह है कि जिस साउथ वेस्ट माइनिंग कंपनी ने येदुरप्पा परिवार को तीस करोड़ रुपये दिए हैं वह माइनिंग कंपनी कांग्रेसी सांसद नवीन जिंदल के भाई सज्जन जिंदल की है. पूरा देश जानता है कि जिंदल परिवार पक्का काँग्रसी है. सज्जन जिंदल के पिता ओपी जिंदल हरियाणा में कांग्रेस के मंत्री थे, तो उनकी मां सावित्री जिंदल आज भी हरियाणा सरकार में मंत्री हैं.
हालांकि इस रिपोर्ट में रेड्डी बंधुओं का भी उल्लेख है जो भाजपा की राज्य सरकार में मंत्री हैं और उनके बारे में कहा गया है कि राज्य सरकार के भरोसे के बाद भी रेड्डी बंधुओं ने अवैध खनन जारी रखी. लेकिन नवीन जिंदल के भाई सज्जन जिंदल के जेएसडबलु की सबसीडरी कंपनी साउथ वेस्ट माइनिंग पर बड़ा सवाल उठाया गया है. लोकायुक्त संतोष हेगड़े का कहना है कि सज्जन जिंदल की कंपनी ने दस करोड़ रुपये येदुरप्पा परिवार के ट्रस्ट को दिए और बीस करोड़ रुपये में येदुरप्पा परिवार की एक ऐसी ज़मीन खरीदी जिसकी बाजार में कीमत महज 1.4 करोड़ थी.
सज्जन जिंदल देश के बड़े स्टील व्यापारी हैं और उनकी कंपनी जिंदल स्टील वर्क्स का वार्षिक कारोबार 23 हजार करोड़ का है. यह जिंदल स्टील वर्क्स ओपी जिंदल समूह का हिस्सा है जिसकी एक अन्य कंपनी जेएसडबलु पावर में यही सज्जन जिंदल अध्यक्ष हैं और कांग्रेस के सांसद नवीन जिंदल सह अध्यक्ष हैं. जाहिर है जब कर्नाटक में खदानों को खोद कर माल भरने की दौड़ लगी हो तो सज्जन जिंदल भला क्यों पीछे रहते. सज्जन जिंदल ने तुरंत एक अस्थायी कंपनी बनाई और उसके नाम पर कर्नाटक में लोह खोदने पहुंच गए. लोकायुक्त संतोष हेगड़े ने अपनी रिपोर्ट में सवाल उठाया है कि ' जो कंपनी वित्तीय रूप से मजबूत नहीं है, इसके द्वारा असाधारण भुगतान किए जाने के बारे में मुझे यह समझने में बहुत मुश्किल हो रही है कि क्या कोई उधार लेकर दान देगा'' रिपोर्ट में कहा गया है कि, ''इसके चलते, कुछ फ़ाइलों को केंद्र को कार्रवाई के लिए भेजा जाना था, जो नहीं भेजा गया. यह भ्रष्टाचार कानून के दायरे में आ सकता है और मुख्यमंत्री के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है.''
इस रिपोर्ट के अनुसार अवैध खनन की काली कमाई में येदुरप्पा के अलावा राज्य सरकार के चार मंत्रियों और 600 के करीब अधिकारी भी शामिल थे. केवल 2006 से 2010 के बीच 16,085 करोड़ के घोटाले का दावा कर रही यह रिपोर्ट इस बात को प्रदर्शित करता है कि मंत्रियों, अधिकारियों और खनन माफिया के मजबूत नेटवर्क ने खजाने को केसे इतना लूटा है. इसके अलावा कांग्रेस के एक नेता और जनता दल (एस) के पूर्व मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी का नाम भी इस रिपोर्ट में शामिल है.
Tags: Afif Ahsen, BJP, Daily Pratap, Lok Ayukt, Vir Arjun, Yadyurappa

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