Search

Monday, 7 November 2011

क्या गांधीवादी अन्ना झूठ बोल रहे हैं?


Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 7th November 2011
अफ़ीफ़ अहसन
अभी तक तो यही आरोप लग रहा था कि टीम अन्ना को संसदीय लोकतंत्र पर विश्वास नहीं है, लेकिन पिछले दिनों टीम अन्ना में दिखाई दिऐ बिखराव की समीक्षा करने से यह लगता है कि टीम अन्ना में आंतरिक लोकतंत्र का भी अभाव है और उसका शिकार न केवल टीम के अन्य सदस्य हुए हैं बल्कि अन्ना हज़ारे खुद भी इसका शिकार नजर आ रहे हैं. इसका पता इसी बात से लग जाता है कि अन्ना हज़ारे को बार बार अपना बयान बदलने पर मजबूर किया जा रहा हे. उन्हैं अपने विचारों को व्यक्त करने की पूरी स्वतंत्रता नहीं है.
पहले 2 नवंबर को अन्ना का यह बयान सामने आया था कि वह किसी एक पार्टी या उम्मीदवार का विरोध नहीं करेंगे बल्कि वह लोगों से यह अपील करेंगे कि वे केवल साफ छवी वाले उम्मीदवारों को ही वोट दें. मगर बाद में 4 नवंबर को न जाने किस दबाव में उन्होंने अपना बयान बदल दिया और यह कहा कि वह लोगों के बीच जाएंगे और उनसे कांग्रेस को वोट न देने की अपील करेंगे.
गत दिनों टीम अन्ना से कई लोग नाता तोड़ चुके हैं. कुछ दिन पहले ही पीवी राजगोपाल और राजेंद्र सिंह ने टीम अन्ना में कुछ लोगों द्वारा गैर लोकतांत्रिक तरीके अपनाए जाने और अन्य सदस्यों की राय ना लिए जाने पर अपने आप को इस अभियान से अलग कर लिया था.
अब अन्ना हज़ारे ब्लॉगर राजू परूलेकर ने जन लोकपाल बिल पास करने की मांग कर रही टीम अन्ना सदस्यों, अरविंद केजरीवाल, प्रशान्त भूषण और किरण बेदी की जमकर निंदा करते हुए उन्हें अलोकतांत्रिक ओर फ़ा‍सिस्ट बता डाला है. अन्ना के ब्लॉग पर डाली गई अपनी पोस्ट में राजू ने अन्ना का बचाव करते हुए उनकी टीम के प्रमुख सदस्यों पर हमला बोला है. एक निजी चैनल से बातचीत में राजू परूलेकर ने अरविंद केजरीवाल पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि वह अन्ना का सम्मान नहीं करते. राजू के अनुसार अरविंद टीम की सभाओं में हावी होते हैं और किसी की बात नहीं सुनते. राजू ने कहा कि कुमार विश्वास से अन्ना हज़ारे को पत्र साजिश के तहत लिखवाया गया था. राजू का दावा है कि किरन बेदी और अरविंद केजरीवाल ने उनसे कहा था कि कोइ भी ब्लॉग पोस्ट पर डालने से पहले उनकी अनुमति ली जाए.
राजू ने अपनी पोस्ट में लिखा है, केजरीवाल, बेदी प्रशान्त भूषण ने 30 अक्टूबर को रालेगण सिद्धि में सबके सामने अन्ना हज़ारे के विचारों को दबा दिया. केजरीवाल, प्रशान्त भूषण, किरण बेदी ने गैर लोकतांत्रिक, फ़ासिस्ट और अन्ना के प्रति अपमान भरा रुख दिखाते हुए कोर कमेटी की बैठक के फैसले को अन्ना हज़ारे पर थोप दिया. राजू ने कहा कि उन्होंने अन्ना की तरफ से विरोध किया. टीम अन्ना के जाने के बाद हज़ारे ने बंद कमरे में उनसे बात की. 23 अक्टूबर के अन्ना के कथित पत्र के बारे में राजू ने ब्लॉग पर लिखा है कि जब अन्ना, केजरीवाल, बेदी, भूषण और उनके प्यादों से परेशान होकर उन्हें कोर कमेटी से हटाने का मन बनाकर पत्र लिख रहे थे तब उनके सचिव सुरेश पठारे वहां मौजूद थे. पठारे ने अन्ना को रोकने की कोशिश की थी, लेकिन वे रुके नहीं. इसके बाद सुरेश ने मुझसे अनुरोध किया कि अन्ना का यह खत पोस्ट के लिए ब्लॉग पर अपलोड नहीं करें.
राजू ने टीम अन्ना सदस्यों की आलोचना करते हुए कहा, देश के गैर राजनीतिक संगठनों और भगत सिंह, राजगुरू और सहदेव जैसे युवाओं को भ्रष्टाचार के खिलाफ अन्ना जी के लिए लड़ाई लड़ना होगी. इन युवाओं को 25 लोगों की स्वंयभु टीम (अलोकतांत्रिक और गैर संवैधानिक) से कुछ पूछने की जरूरत नहीं है.
राजू के अनुसार, 23 तारीख का पत्र और सभी बातों से साबित हो जाता है कि केजरीवाल, प्रशांत भूषण और बेदी अवसरवादी हैं.
अन्ना ब्लॉग के लिए मराठी में अपनी बात लिख कर राजू को देते थे. वह उसका अनुवाद करके उसे अन्ना के ब्लॉग पर डालते थे. राजू का कहना है कि अन्ना ने 23 अक्टूबर को लिखा यह पत्र भी उन्हें इंटरनेट पर डालने के लिए दिया था. राजू ने अन्ना के लिखे इस पत्र को सार्वजनिक करके टीम अन्ना के लिए नई मुश्किलें खड़ी कर दी हैं. इस पत्र के अनुसार अन्ना हज़ारे अपनी कोर कमेटी को भंग कर नई टीम का गठन करना चाहते थे. यह पत्र अन्ना ब्लॉग पर अंग्रेजी और मराठी में पोस्ट किया गया है जो इस प्रकार है.
“मैं टीम अन्ना के सभी सदस्यों को यहां यह जानकारी दे रहा हूँ कि बहुत जल्द मैं अपनी कोर कमेटी के पुनर्गठन के बारे में सोच रहा हूँ. इसकी वजह यह है कि मुझे लगातार देश भर से आंदोलन के समर्थन में पत्र मिल रहे और लोग भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में अपने जीवन सौंपने के लिए तैयार हैं. यह पत्र सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज, सेना के कर्नल, ब्रिगेडियर, प्रोफेसर, प्रिंसिपल और अपने विचारों वाले पढ़े लिखे लोगों ने लिखे हैं. बहुत जल्दी उन लोगों की पहचान करके उन्हें उनके अनुसार काम सौंप दिया जाएगा. देश के सभी भागों और राज्यों से ऐसे लोगों को आंदोलन में शामिल करना चाहता हूँ जो समाज सेवा करना चाहते हैं.
पत्र लिखने वाले लोगों का कोई निजी एजेंडा नहीं है और उन लोगों ने सिर्फ देश की सेवा और सेवा भाव के उद्देश्य से आंदोलन में शामिल होने की मंशा जताई है. अब हमें टीम अन्ना का विस्तार करना चाहिए और उन लोगों को शामिल करना चाहिए. कार्यसमिति बनाने के लिए हमें कारगर लोगों को अपने साथ शामिल करना होगा. कोर कमेटी बनाते समय देश के सभी राज्यों के लोगों को प्रतिनिधित्व दिया जाएगा. प्रभावी संचार के लिए उन सब को ऑनलाइन जोड़ा जाएगा.
इन स्वयंसेवकों, उदाहरण के लिए 100 स्वयंसेवकों के रहने और खाने का खर्च साफ छवी के लोगों से दान लेकर उठाया जाएगा. हमें देश भर में प्रभावी प्रदर्शन आयोजित करने में मदद मिलेगी. हमें लंबा युद्ध लड़ना है. भ्रष्टाचार मुक्त हिंदुस्तान बनाने के लिए हमें उन सभी का जो अब तक अभियान से अलग थलग हैं उपयोग करना होगा. मुझे विश्वास है कि यह न केवल भारत बल्कि भ्रष्टाचार से मुक्ति चाहने वाले अन्य देशों के लिए भी एक अच्छा उदाहरण होगा. हम संस्था का निर्माण नहीं कर रहे हैं बल्कि राज्य और जिला स्तर पर अपने स्वयंसेवक बना रहे हैं.
जब राष्ट्रय स्तर पर आंदोलन चल रहा होगी तो राज्य स्तर पर भी लोग जुड़ते हुए दिखाई देंगे. इस संघर्ष में अध्यक्ष, सचिव या खजांची नहीं होगा. लोग केवल स्वयंसेवकों के तौर पर ही काम करेंगे.
स्वाभाविक रूप से हमें वित्तीय सहायता की जरूरत है लेकिन दान के रूप में नकद रकम स्वीकार नहीं की जाएगी केवल चेक और ड्राफ्ट के माध्यम से ही दान लिया जाएगा. लेकिन यह दान भी उन लोगों से ही लिया जाएगा जिन्हें भगत सिंह, राजगुरो और सहदेव की शहादत में विश्वास होगा. के बी हज़ारे”
लेकिन अन्ना ने शनिवार को राजू के आरोपों का जवाब देते हुए घोषणा की, “मैं अपना ब्लॉग अब बंद दूंगा. अगर पत्र पर हस्ताक्षर होंगे तो वह सही पत्र है. में अपने विचार कभी कभी लिखता रहता हूँ. लेकिन उसे तब ही अंतिम माना जाएगा जब इस पर मेरे हस्ताक्षर होंगे. मेरी टीम पर आरोप लग रहे हैं. आरोप लगने के बाद मैं सोच रहा था क्या टीम में बदलाव लाया जाना चाहिए? मुझे लगता है कि हमें बदनाम करने की साज़िश है.
जब शुक्रवार को अन्ना से संवाददाता सम्मेलन में इस बारे में पूछा गया था तो उन्होंने कहा था कि मैंने कोर कमेटी भंग करने की कभी बात नहीं की. अन्ना ने राजू से कभी बात या मुलाकात होने तक से इनकार कर दिया था. उल्टे उन पर निशाना साधते हुए कहा था कि वह हवा में बात क्यों करते हैं? इससे ठेस पहुंचने पर ही राजू ने खुद को सही साबित करने के लिए 23 अक्तूबर, 2011 को लिखा अन्ना का पत्र उनके ब्लॉग पर डाल दिया है.
इन सब बातों से यह सवाल पैदा होता है कि क्या गांधीवादी अन्ना झूठ बोल रहे हैं?
नोट: आप यह लेख और पुराने सभी लेख http://afifahsen.blogspot.com पर भी पढ़ सकते हैं.
Afif Ahsen, Anna Hazare, Arvind Kejriwal, daily, Kiran Bedi, Vir Arjun,

No comments:

Post a Comment