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Monday, 16 January 2012

2 जी घोटाला और साम्प्रदायिकता

Vir Arjun, Hindi Daily Newspaper Published from Delhi
Published on 16th  January 2012
अफ़ीफ़ अहसन
आप सवाल करेंगे की 2 जी घोटाले का साम्प्रदायिकता से किया लेना देना हे। मगर ये सच्च है कि सियासत दां अपने बचाव के लिये किसी भी मुद्दे को बीच में घसीट लेते हैं। काफ़ी दिन से सुब्रामणियम स्वामी को ये ख़ौफ़ सता रहा था कि कहीं चिदम्बरम उन को गिरफ़्तार ना करवादें। उन का ये ख़ौफ़ बेबुनियाद भी नहीं था। उन की गिरफ़्तारी किसी भी वकत हो सकती थी क्योंकि उन्होंने काम ही ऐसा विवादास्पद किया था।
दिल्ली पुलिस की क्राईम ब्रांच ने पिछले साल अक्तूबर में स्वामी के ख़िलाफ़ एक एफ़आईआर दर्ज की थी। ये एफ़आईआर जुलाई में एक अंग्रेज़ी देनिक डीएनए में प्रकाशित सुब्रामणियम स्वामी के एक कालम के बाद दर्ज की गई थी जिस में उन्होंने मुस्लमानों के सम्बंध में बेहूदा और भद्दी बातें लिखें थीं और नफरत फैलाने का काम किया था।
स्वामी ने अपने कालम में साम्प्रदायिकता का प्रदर्शन करते हुए फ़रमाया था कि हिंदूस्तान में सिर्फ उन्ही मुस्लमानों को वोट का हक़ मिलना चाहीए जो इस बात को स्वीकार करें कि उनके पूर्वज हिन्दू थे। स्वामी ने हिंदूस्तान की सैंकड़ों मसजिदों को ढाने की भी वकालत की थी।
अपनी एफ़आईआर में पुलिस का ये कहना है कि उन का यह लेख साम्प्रदायों के बीच दुश्मनी और नफ़रत फैलाने वाला है।
स्वामी ने अपनी गिरफ़्तारी के डर से दिल्ली हाईकोर्ट में गुरूवार को अपने वकील महीन प्रधान के द्वारा अग्रिम ज़मानत की अर्ज़ी दाख़िल की। स्वामी की तरफ़ से सीनीयर वकील केटीऐस तुलसी ने बहस की और ये दलील पेश की कि क्योंकि 2 जी इसपेकट्रम मामले में चिदम्बरम के रोल को लेकर स्वामी ने अदालत में उन के ख़िलाफ़ सबूत पेश किये थे, चिदम्बरम की तरफ से मेमो, सीआईटी और ग्रह मंत्री और पुर्व संचार मंत्री ए राजा के बीच हुए पत्र-व्यवहार की कापी कोर्ट को सौंपी थी, 2 जी घोटाले में चिदम्बरम को मुल्ज़िम बनाए जाने की मांग की है और ये इल्ज़ाम लगाया है कि घोटाले को राजा और चिदम़्बरम ने मिल कर सामूहिक रूप से अंजाम दिया है। और ये भी इल्ज़ाम लगाया है कि ग्रह मंत्री चिदम्बरम ने देश की सुरक्षा को भी ख़तरे में डाल दिया है। इसलिए चिदम़्बरम ने बदले की नीयत से उनके ख़िलाफ़ ये केस दर्ज कराया है और वह उनको गिरफ़्तार करवाना चाहते हैं ताकि वो आगे गवाही ना दे सकें। स्वामी के वकील ने कहा कि स्वामी का लेख उन की एक छः साल पुरानी किताब पर आधारित है और इस किताब के छपने के बाद कोई अप्रिय घटना नहीं घटी थी।
दिल्ली हाई कोर्ट के माननीय जज जस्टिस ऐमऐल मेहता ने स्वामी की अग्रिम ज़मानत अर्ज़ी के मामले में सुनवाई करते हुए कहा कि हम धर्मनिरपेक्ष देश हैं और हमें इस प्रणाली का सम्मान करना चाहिए। अदालत ने कहा कि हिंदुस्तान कोई ब्रिटेन या यूरोपियन देश जैसा नहीं है बल्कि हमारी गंगा जमुनी संस्कृति है जिस पर हमें गर्व होना चाहिए। अदालत ने स्वामी से कहा कि अगर वो ये क़ौल दें कि उकत किताब से सम्बंदधित आगे कुछ नहीं लिखेंगे तो उनको राहत दी जा सकती है। इस के बाद स्वामी ने कोर्ट को ये आशवासन दिलाया कि व भविष्य में ऐसा कोई लेख नहीं लिखेंगे जिस से भावनायें आहत हों। बाद में जस्टिस ऐमऐल मेहता ने स्वामी को उन के विवादास्पद भड़काऊ लेख के मामले में संभावित गिरफ्तारी से 30 जनवरी तक अंतरिम राहत दे दी। अदालत ने दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी करते हुए जवाब भी मांगा है।
इस से पहले स्वामी को तब बहुत ज़बरदस्त झटका लगा था जब दिसंबर में 375 साल पुरानी हारवर्ड यूनीवर्सिटी (कैंब्रिज, अमरीका) ने सुब्रामणियम स्वामी को अपने सम्मानित शैक्षणिक संस्थान से बाहर कर दिया था। इसी के साथ उनके दवारा पढ़ाए जा रहे दो पाठयक्रम भी यूनीवर्सिटी से हटा दिए गए जिस की शिक्षा के लिए स्वामी जी यूनीवर्सिटी में बतोर प्रोफ़ैसर नियुक्त रहे थे।
यह उल्लेखनीय हे कि स्वामी के विवादास्पद लेख पर एतराज़ात के बावजूद यूनीवर्सिटी ने अभिTop of Form
व्यक्त की स्वतंत्रता का लाभ देते हुए डॉक्टर साहब को शिक्षण के लिए आमंत्रित करना चाहा था मगर 400 से अधिक छात्रों ने प्रोफेसर स्वामी को हटाए जाने की अनुरोध याचिका दायर की। विश्वविद्यालय फ़ेकलटीज़ ने बैठक में बहस के बाद तय किया कि स्वामी का लेख एक धार्मिक समुदाय के खिलाफ नकारात्मक प्रचार और पवित्र स्थलों के खिलाफ हिंसा की घोषणा करता है। इसलिए हारवर्ड यूनीवर्सिटी की नैतिक जिम्मेदारी बनती है कि वह खुद को ऐसे व्यक्ति के साथ न जोडे जो किसी अल्पसंख्यक वर्ग के खिलाफ घृणा का भाव दर्शाता है।
अब सुनिए उन साहब का हाल जिनकी ओर से स्वामी की गिरफ्तारी का खतरा बताया जा रहा है यानी के पी चिदंबरम। वह भी बहाने बाजी में स्वामी से कम नहीं हैं। 2 जी घोटाले में अपने आप को फंसता देखकर उन्होंने भी इसी प्रकार का बहाना बनाया और आरोप लगाए। पिछले साल जुलाई में एक संवाददाता सम्मेलन करके उन्होंने यह आरोप लगाया कि दक्षिण पंथी आतंकवादी दलों के खिलाफ आतंकवाद के नौ मामले दर्ज हैं जिनमें बम बनाने और लोगों की हत्या के मामले हैं, इसलिए भारतीय जनता पार्टी, यूपीए के चु‍निन्दा मंत्रियों के खिलाफ आरोप लगा रही है क्योंकि यूपीए सरकार उनकी जांच में तेजी लाई है। चिदंबरम ने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा द्वारा हमले किए जाने का एक कारण यह भी हो सकता है कि अयोध्या मामलों में सरकार अदालत को लगातार सुनवाई करने के लिए राजी करने में कामयाब रही है। उन्होंने यह बात उस सवाल के जवाब में कही कि भाजपा उनको 2 जी मामले से क्यों लिंक कर रही है।
चिदंबरम ने कहा था कि वह किसी दूसरी वजह के बारे में सोच भी नहीं सकते। मैं सोचता हूँ कि कारण यह है कि उन्हें लगता है कि यह सरकार गंभीरता से बम धमाके के मामलों की जांच कर रही है जिनमें दक्षिण पंथी बुनियाद परस्त तत्व शामिल हैं। उनहोंने कहा था की स्पष्ट रूप से दक्षिण पंथी बुनियाद परस्त तत्वों में से कई आरएसएस से जुड़े हैं।
गृहमंत्री पी चिदम्बरम द्वारा बम हमलों के लिए इन गुटों पर आरोप लगाए जाने पर मज़बूत टिप्पणी करते हुए भाजपा ने कहा था कि उनका यह बयान पाकिस्तान द्वारा 26/11 हमलों के दोषियों के खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई न करने के पक्ष को मजबूत करेगा।
भाजपा के प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने कहा था कि मुझे लगता है कि एक शिष्ट वकील, जैसे की चिदंबरम हैं, ने अपने बचाव में कुछ बहतर तर्क ईजाद किये होते। अब जबकी उनकी पूरी गर्दन गहराई तक 2 जी स्कैंडल में फंसी है, जिसकी वजह से करदाताओं के लाखों करोड़ रुपये का नुकसान हुआ और जो ‍दिनों दिन तेजी से जाहिर हो रहा है।
यह वही चिदंबरम साहब हैं जो ताल ठोंक कर कह रहे थे के बटला हाउस एनकाउन्टर सही था और उसकी जाँच की कोई आवश्यकता नहीं है। अब फिर उन्होंने अपने इस मत को दोहराया है। जब उनका पक्ष यहां भाजपा के पक्ष से बिल्कुल मेल खाता है तो फिर वह कैसे भाजपा को अपना दुश्मन बताते हैं।
चिदंबरम और स्वामी में इतना अंतर है कि जब चिदंबरम को लगा कि वह 2 जी घोटाले में फंस रहे हैं तो उन्होंने दक्षिण पंथी सोच रखने वालों के खिलाफ लिए गए एक्शन को अपनी ढाल के रूप में इस्तेमाल किया जबकि दूसरी तरफ जब स्वामी को लगा की वह अपनी दक्षिण पंथी सोच के कारण फंस रहे हैं तो उन्होंने 2 जी को अपनी ढाल के रूप में इस्तेमाल किया़।
हमारे देश में काफी बुद्धिमानी और सहनशील लोग रहते हें और एसी अनर्गल और बेकार बातों पर तुरंत प्रतीक्रया नहीं करते मगर एसी बातों से धीरे-धीरे, अन्दर ही अन्दर नफरत का जवालामुखी सुलगता रहता हे और वह कभी भी फट सकता हे।
दिल्ली हाईकोर्ट के माननीय जज जस्टिस एमएल मेहता की जितनी तारीफ की जाए कम है उन्होंने यह बात साफ कर दी है कि गंगा जमुनी संस्कृति वाले देश हिन्दुस्तान में इस तरह की घृणा फैलाने की कोई जगह नहीं है। उन्होंने स्वामी से करार भी ले ली है कि अब वह आगे इस प्रकार के लेख नहीं लिखेंगे।
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